Saturday 28-03-2026

बाल भिक्षावृत्ति और बाल श्रम पर रोक के बावजूद बच्चे मांग रहे भीख, कर रहे मजदूरी

Posted By Vinod Kewat
  • Updated Wednesday Feb 26 2025
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बाल भिक्षावृत्ति और बाल श्रम पर रोक के बावजूद बच्चे मांग रहे भीख, कर रहे मजदूरी

नर्मदापुरम। संभागीय मुख्यालय  में इन दिनों नियम कानूनों की धज्जियां खुलेआम उड़ाई जा रही हैं। रोक के बाद भी शहर में बाल भिक्षावृत्ति करते बच्चे देखे जा सकते हैं। कुछ लोगों ने भिक्षावृत्ति को भरण-पोषण का जरिया बना लिया है जिसमें उनके मासूम बच्चे भी शामिल है, जो भीख मांगते देखे जा सकते हैं। भोपाल में कुछ समय पूर्व ही भीख लेने और देने वालों के खिलाफ प्रशासन सख्त हुआ है लेकिन नर्मदापुरम प्रशासन बाल भिक्षावृत्ति सिर्फ जागरूकता अभियान तक सीमित होकर रह जाता है। जिले में नर्मदा नदी के तट पर अमावस्या, पूर्णिमा सहित त्योहारों पर भिखारियों की संख्या देखी जा सकती है, जिसमें बच्चे भी शामिल होते हैं । बाल भिक्षावृत्ति भारत में गंभीर मुद्दों में से एक है। जो बच्चों के अधिकारों के हनन से जुड़ा एक सामाजिक मुद्दा है। बाल भिक्षावृत्ति, उन बच्चों को संदर्भित करता है जो खेलने और शिक्षा की उम्र में भिक्षा मांगते हैं। बाल भिक्षावृत्ति के अलावा बच्चे मजदूरी भी कर रहे हैं। रोकथाम के लिए शासन से प्राप्त बजट को समय समय पर जागरूकता अभियान के जरिए खर्च तो करती है लेकिन इसके बावजूद  नर्मदापुरम के सुप्रसिद्ध सेठानी घाट, विवेकानंद घाट, नेहरू पार्क सहित रेलवे स्टेशन, चौक चौराहों पर बाल भिक्षावृत्ति करते बच्चे देखे जा सकते। पढ़ाई-लिखाई और खेलने-कूदने की उम्र में मासूम बचपन घाट पर बैठकर भिक्षावृत्ति का काम कर रहा है। कुछ बच्चे इस काम में समझदार हो गए हैं तो कुछ अभी इसका प्रशिक्षण ले रहे हैं। यहां पर अक्सर सार्वजनिक स्थानों पर मासूम बच्चे भिक्षावृत्ति करते दिखाई देते हैं। कोई अपने माता-पिता के साथ भिक्षावृत्ति करता है तो कोई बच्चा अकेले ही भिक्षावृत्ति के लिए निकल पड़ता है। भीख मांगना कुछ के लिए धंधा बन चुका है, तो कुछ के लिए मजबूरी। ऐसे में इस बात को कैसे नजर अंदाज किया जा सकता है कि ये बच्चे बड़े होकर अपराधी या फिर नशेड़ी नहीं बनेंगे। प्रशासन और जिम्मेदारों की घोर लापरवाही के कारण बच्चों का भीख मांगना और बच्चों से भीख मंगवाना आज के समय में कथित तौर पर ज्यादा पैसे कमाने का जरिया भी बन गया है।

बुधवार को महाशिवरात्रि पर नर्मदा नदी के तट पर बने सेठानी घाट और विवेकानंद घाट सहित अन्य घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ कई बच्चों को रुपया पैसे, अनाज और खाना देती नजर आई।  बाल भिक्षावृत्ति की कार्यवाही के संबंध में जब हमने महिला एवं बाल विकास अधिकारी नर्मदापुरम से उनको फोन लगाया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।


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